अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास

अलाउद्दीन खिलजी की इतिहास से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण तथ्य जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। Alauddin khilji history in Hindi, Alauddin khilji and padmavati,

अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin khilji)

अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin khilji) खिलजी वंश का दूसरा शासक था। अलाउद्दीन खिलजी का जन्म 1266-67  ईसवी में हुआ था।

अलाउद्दीन में 1299 में गुजरात पर आक्रमण किया। गुजरात में ही उसने मलिक काफूर को खरीदा जो आगे चलकर उसका प्रमुख सेनापति बना। 

अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम शिहाबुद्दीन खिलजी था, जोकि जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का भाई था। 

शिहाबुद्दीन खिलजी की अकाल मृत्यु हो जाने के उपरांत उसके चाचा जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ही उसके संरक्षक थे। History of Alauddin Khilji

देवगिरी की विजय से अलाउद्दीन की सुल्तान बनने की इच्छा प्रबल हो गयी  और उसने 19 जुलाई 1296 ईस्वी को धोखे से सुल्तान जलालुद्दीन की हत्या करके सत्ता हासिल कर ली थी। 

अलाउद्दीन खिलजी ने अपना राज्य अभिषेक बलबन के लाल महल में करवाया और साथ ही खलीफा से सुल्तान की पद सम्भाली। 

1311 ईस्वी में रणथंबोर के शासक हम्मीर देव को पराजित किया। अमीर खुसरो ने यहां पर "जौहर प्रथा" का वर्णन किया है। 

Alauddin khilji history PDF

अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण भारतीय अभियान का नेतृत्व सेनापति मलिक काफूर ने किया था। 

अलाउद्दीन के शासनकाल की सबसे प्रमुख विशेषता उसकी बाजार व्यवस्था थी। 

1303 ईस्वी  में चित्तौड़ विजय के पश्चात अलाउद्दीन ने एक आदेश जारी कर खाद्य पदार्थ, चीनी और तेल से लेकर सुई  तथा आयात  किए गए कीमती वस्तुओं से लेकर घोड़ो, पशु तथा गुलामों के मूल्य निर्धारित कर दिया था। 

अलाउद्दीन खिलजी ने इसके लिए दिल्ली में तीन प्रकार के बाजार स्थापित किए थे। 

अलाउद्दीन खिलजी ने राशनिंग की व्यवस्था भी लागू की थी। 

अलाउद्दीन खिलजी के राज दरबार में अमीर खुसरो तथा हसन सरीखे विद्वान रहते थे। 

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Sultan Alauddin Khilj

अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में वृत्ताकार लड़ाई किला बनवाया, जिसमें  सात द्वार थे इसे "कोसके सीरी" के नाम से भी जाना जाता था। 

अलाउद्दीन खिलजी ने 1311 ईस्वी में कुतुब मीनार के निकट उससे दोगुनी आकार की एक मीनार बनवाने का कार्य प्रारंभ किया था परंतु वह उसे पूरा नहीं कर सका। 

अलाउद्दीन का शासन काल मंगोलो के भयानक आक्रमणों के लिए भी विख्यात है। 

अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) का महान सेनापति मलिक काफूर गुजरात विजय के दौरान नुसरत खान द्वारा 1000 दीनार में खरीदा गया जिससे उसे हजार दिनारी भी कहा जाता था। 

चित्तौड़ के राणा रतन सिंह की रानी पद्मिनी की कहानी का आधार बनाकर 1540 ईस्वी में मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत ग्रंथ की रचना की थी। 

अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) दिल्ली सल्तनत  का प्रथम सुल्तान था, जिसने दक्षिण भारत में विजय पताका फहराया। 

अलाउद्दीन खिलजी की रोचक तथ्य

अलाउद्दीन खिलजी ने द्वितीय सिकंदर की उपाधि धारण की थी। 

अलाउद्दीन के समय दिल्ली में सर्वाधिक मंगोल आक्रमण हुए। अलाउद्दीन ने मंगोल आक्रमण से बचने के लिए 1304 ईस्वी में सीरी में एक किला का निर्माण करवाया था।

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का पहला शासक था जिसने भूमि की पैमाइश करवाई। भू-राजस्व कुल उत्पादन का 50% लगाया। उसने मध्यस्थों ( खुत, चौधरी, मुकददम) का अंत कर दिया। "घरी कर" और चराई कर लागू किया। 

अलाउद्दीन ने खम्स यानि लूट के माल में राज्य का अंश 4/5 तथा सैनिकों का 1/5 निर्धारित किया जो पूर्व में क्रमशः 1/5 भाग तथा 4/5 भाग था। 

दीवान-ए-मुख्तराज विभाग की स्थापना की जो भू-राजस्व की बकाया राशि को वसूलता था। 

सैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण नीति लाई थी जिससे सैनिकों को सस्ते मूल्य पर जरूरी वस्तुएं प्राप्त की जा सके। 

अलाउद्दीन खिलजी ने सैन्य क्षेत्र में स्थाई सेना का गठन, नगद वेतन तथा दाग हुलिया प्रणाली लागू करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य थे। 

इस विभाग के अंतर्गत प्रत्येक बाजार के लिए अधीक्षक (शहना- ए-मंडी) नियुक्त किए गए थे। 

बाजार की गतिविधियां तथा सहना (बाजार अधिकारियों) पर निगरानी रखने के लिए  "बरीद" मुंहियान" तथा गुप्तचर नियुक्त किए गए। 

अमीर खुसरो की "खजाईन-उल-फ़तूह"  इब्नबतूता की "रेहला" तथा इशामी  की "फुतुह-उस-सलातीन से बाजार नियंत्रण नीति की जानकारी प्राप्त होती है। 

अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण व्यवस्था

Alauddin Khilji